हल्द्वानी/नैनीताल – जनपद नैनीताल में निजी विद्यालयों द्वारा फीस, किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर की जा रही मनमानी पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत शिक्षा कोई व्यवसाय नहीं बल्कि समाज सेवा है और इसे लाभ कमाने का जरिया नहीं बनाया जा सकता।
निजी स्कूलों के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को किसी एक दुकान या प्रकाशन से किताबें अथवा यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। ऐसा करना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है और यह कानूनन दंडनीय अपराध है।
फीस बढ़ोतरी पर सख्त नियम
जिलाधिकारी ने शासनादेशों का हवाला देते हुए कहा कि फीस में किसी भी प्रकार की वृद्धि पारदर्शी, तर्कसंगत और अभिभावकों से संवाद के बाद ही की जानी चाहिए। बिना ठोस कारण और विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) से परामर्श के फीस बढ़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही विद्यालयों को फीस वृद्धि का लिखित औचित्य पूर्व वर्षों के रिकॉर्ड सहित सुरक्षित रखना होगा।

किताबों और यूनिफॉर्म पर भी नियंत्रण
प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि स्कूल एनसीईआरटी/एससीईआरटी अथवा शासन द्वारा अनुमन्य पुस्तकों को ही प्राथमिकता देंगे। किसी एक प्रकाशन या दुकान से किताबें खरीदने का दबाव नहीं बनाया जाएगा। कॉपियों पर स्कूल का लोगो छपवाने पर भी रोक लगाई गई है।
यूनिफॉर्म के मामले में भी सख्ती बरतते हुए कहा गया है कि यूनिफॉर्म सामान्य बाजार में आसानी से उपलब्ध हो और उसे बार-बार बदला न जाए।
फीस स्ट्रक्चर सार्वजनिक करना अनिवार्य
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी निजी विद्यालयों को अपना फीस स्ट्रक्चर, यूनिफॉर्म विवरण और पुस्तक सूची विद्यालय परिसर के नोटिस बोर्ड तथा वेबसाइट पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त कोई भी अतिरिक्त शुल्क लेना प्रतिबंधित रहेगा।
प्रवेश नियमों का होगा पालन
जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि कक्षा-1 में वही बच्चे प्रवेश पाएंगे जो 1 अप्रैल तक 6 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हों। उम्र संबंधी नियमों में किसी भी प्रकार की ढील स्वीकार नहीं की जाएगी।
सभी निजी स्कूलों का होगा निरीक्षण
मुख्य शिक्षाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि जनपद के सभी निजी विद्यालयों का निरीक्षण नामित समिति द्वारा कराया जाए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित विद्यालयों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
इस फैसले से जिले के हजारों अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता व अनुशासन स्थापित होने का रास्ता साफ हुआ है

