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पॉक्सो और महिला सुरक्षा पर बड़ा अभियान, डीएम ने की प्रगति की समीक्षा….

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रूद्रपुर – जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया की अध्यक्षता में जनपद में जेंडर सेंसिटाइजेशन (लैंगिक संवेदनशीलता) से जुड़े कार्यक्रमों की प्रगति को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला विकास अधिकारी सुशील मोहन डोभाल, उप जिलाधिकारी किच्छा गौरव पांडेय, जिला प्रोबेशन अधिकारी व्योमा जैन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में अवगत कराया गया कि जनपद में 25 नवंबर से 23 दिसंबर तक जेंडर सेंसिटाइजेशन को लेकर कुल 114 गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें 31 गतिविधियां स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से, 27 गतिविधियां महिला हेल्पलाइन एवं चाइल्ड हेल्पलाइन द्वारा तथा शेष अन्य विभागीय सहभागिता से संपन्न की गईं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कुल 15,979 लाभार्थियों को जागरूक किया गया।

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अधिकारियों ने बताया कि जनपद के विभिन्न विद्यालयों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में पॉक्सो अधिनियम, बाल सुरक्षा एवं महिला सुरक्षा से संबंधित जागरूकता अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं। वहीं ग्राम्य विकास विभाग द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। विभाग द्वारा अब तक 191 जेंडर प्लेज कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं तथा 507 सत्र जेंडर आधारित हिंसा विषय पर संपन्न कराए गए हैं।

जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने समीक्षा के दौरान जिला विकास अधिकारी एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देश दिए कि जेंडर सेंसिटाइजेशन से संबंधित समस्त सूचनाएं एक सप्ताह के भीतर पोर्टल पर अपलोड करना सुनिश्चित करें, ताकि शासन स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग हो सके।

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बैठक के दौरान एक प्रेरणादायक क्षण भी देखने को मिला, जब विशाखा दिवाकर, पुत्री स्वर्गीय धर्मपाल सिंह, निवासी बाजपुर (जनपद ऊधम सिंह नगर) को अनाथ बच्चों के लिए राज्य सेवा में दिए गए क्षैतिज आरक्षण के अंतर्गत वन दरोगा पद पर चयनित होने पर जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित किया गया। जिलाधिकारी ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देश दिए कि विशाखा दिवाकर को रोल मॉडल के रूप में जनपद के विद्यालयों में जेंडर सेंसिटाइजेशन विषय पर मोटिवेशनल लेक्चर दिलाए जाएं, ताकि छात्र-छात्राएं उनसे प्रेरणा ले सकें।

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जिलाधिकारी ने कहा कि जेंडर सेंसिटाइजेशन केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और सुरक्षित वातावरण बनाने की दिशा में एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसमें सभी विभागों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।