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बेटी बचाओ कहने वाली सरकार, भोजनमाताओं को क्यों नहीं दे रही अधिकार?…. 

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हल्द्वानी – प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा शनिवार को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में एक जोरदार प्रदर्शन व जनसभा का आयोजन किया गया। यह प्रदर्शन राज्य भर की भोजनमाताओं की स्थायी नियुक्ति और न्यूनतम वेतन जैसी मूलभूत मांगों को लेकर किया गया। सभा का संचालन संगठन की अध्यक्ष शारदा देवी एवं प्रचार मंत्री चंपा गिनवाल ने किया।

सभा को संबोधित करते हुए शारदा देवी ने कहा, “हम 20-22 वर्षों से विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनाते आ रहे हैं, लेकिन बच्चों की संख्या घटते ही हमें काम से निकाल दिया जाता है। इससे हम मानसिक रूप से बहुत परेशान हैं।” यूनियन की महामंत्री रजनी जोशी ने कहा कि भोजनमाताएं एक साथ कई कर्मचारियों का काम करती हैं, उन पर अतिरिक्त कार्य का दबाव डाला जाता है, और विरोध करने पर उन्हें विद्यालय से निकालने की धमकी दी जाती है।

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कार्यकारिणी सदस्य हेमा तिवारी ने कहा कि भोजनमाताओं से चार-चार कर्मचारियों के बराबर कार्य लिया जाता है, लेकिन उन्हें एक कर्मचारी के वेतन के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। वहीं विमल पवार ने कहा कि उन्हें GEO टैगिंग के बहाने स्कूल में अधिक समय तक रोका जाता है और विरोध करने पर हटाने की धमकी दी जाती है। सभा में तुलसी ने कहा कि उन्हें न समय पर वेतन मिलता है और न बोनस, जिससे उनके परिवार की स्थिति और खराब होती जा रही है।

इस प्रदर्शन को कई संगठनों ने अपना समर्थन दिया। प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की अध्यक्ष बिंदु गुप्ता ने कहा कि सरकार ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, लेकिन जब भोजनमाताओं जैसी ज़मीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाएं अपने अधिकार मांगती हैं, तो उनकी आवाज़ को अनसुना कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आशा वर्कर, आंगनबाड़ी और उपनल कर्मियों के साथ भी ऐसा ही शोषण हो रहा है।

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परिवर्तनकारी छात्र संगठन के महासचिव महेश ने कहा कि भोजनमाताओं की मांगें पूरी तरह जायज़ हैं और सरकार को तुरंत इन्हें मान लेना चाहिए। उन्होंने उज्ज्वला योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में गैस की सुविधा तक नहीं दी गई है। क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के टी.आर. पांडे ने कहा कि अधिकांश भोजनमाताएं विधवा, परित्यक्ता या एकल महिलाएं हैं, जिन पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। सरकार द्वारा इनके साथ किया जा रहा व्यवहार अमानवीय है और इन्हें न्यूनतम वेतन और स्थायी रोजगार मिलना चाहिए।

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सभा के अंत में दो प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए — पहला, नैनीताल में 12 वर्षीय बालिका के साथ हुई यौन हिंसा के विरोध में, और दूसरा, शहला के साथ अभद्रता एवं सांप्रदायिक माहौल के खिलाफ। सभा में पुष्पा जलाल, रूपा देवी, मंजू, शोभा, आरती सहित कई भोजनमाताएं शामिल हुईं। संगठन की अध्यक्ष शारदा देवी ने जानकारी दी कि कल मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।