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मुंडन कर जताया विरोध, आरक्षण की मांग पर आंदोलनकारियों का बड़ा ऐलान

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रुद्रपुर/सितारगंज – बंगाली समाज के अधिकारों और आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे “आरक्षण हमारा अधिकार” आंदोलन ने रविवार को नया रूप ले लिया। आंदोलन के तहत बड़ी संख्या में युवाओं ने मुंडन कराकर सरकार के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। कार्यक्रम का नेतृत्व समाजसेवी सुब्रत कुमार विश्वास ने किया।

इस दौरान डॉ. सुनील हालदार, सुभाष राय, निपेन विश्वास, राजू विश्वास, धीरज विश्वास समेत अनेक युवाओं ने अपना सिर मुंडवाकर आंदोलन को समर्थन दिया। आंदोलनकारियों ने निर्णय लिया कि मुंडन के दौरान एकत्र किए गए बालों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री तथा अन्य जनप्रतिनिधियों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा जाएगा, ताकि बंगाली समाज की मांगों और संघर्ष की आवाज देश के सर्वोच्च नेतृत्व तक पहुंच सके।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आंदोलन के संयोजक सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि बंगाली समाज लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक ही देश में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग व्यवस्थाएं और अधिकार सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बंगाली समाज ने देश की आजादी, राष्ट्र निर्माण, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर है।

उन्होंने कहा कि “आरक्षण हमारा अधिकार है और समाज अपने अधिकारों की प्राप्ति तक संघर्ष जारी रखेगा। आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा तथा आमरण अनशन जैसे कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।”

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सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि यह संघर्ष केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में रह रहे बंगाली समाज की आवाज है। उन्होंने कहा कि ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, झारखंड, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में बंगाली समाज अपने अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहा है और यह आंदोलन उनकी आवाज को भी मजबूती देगा।

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उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और संवैधानिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए संचालित किया जा रहा है। पूरा आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है।

इस अवसर पर सुभाष राय ने कहा कि बंगाली समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए यदि उन्हें अपना जीवन भी समर्पित करना पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं, बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है और इसके लिए समाज को एकजुट होकर आगे आना होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि समाज के लोगों को विभिन्न प्रमाण-पत्रों और दस्तावेजों के लिए कई बार अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सभी नागरिकों के लिए समान व्यवहार और सम्मान सुनिश्चित किए जाने की मांग की।

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आंदोलनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और देश के अन्य राज्यों में निवासरत बंगाली समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। साथ ही समाज के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित कर लंबित मांगों के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित युवाओं ने एक स्वर में कहा कि “आरक्षण हमारा अधिकार है” और समाज अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहकर संघर्ष जारी रखेगा।

इस अवसर पर किशोर हालदार, अभिमन्यु साना, सुब्रतन कुमार, डॉ. अली, प्रजापति आर. दास, प्रमोद अली सलमानी, श्याम दत्त लोधी, ओमप्रकाश लोधी, मनीष गुप्ता, अमल मंडल, तरुण विश्वास, निलेश खान, गोपाल मंडल, सुब्रत कुमार विश्वास, डॉ. सुनील हालदार, सुभाष राय, निपेन विश्वास, राजू विश्वास, धीरज विश्वास सहित बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।