हल्द्वानी– बनभूलपुरा रेलवे भूमि प्रकरण और संभावित पुनर्वास प्रक्रिया का असर अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का प्रमुख विषय बनता जा रहा है। यदि रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटता है और बड़े पैमाने पर पुनर्वास होता है, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में हल्द्वानी सीट पर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। बनभूलपुरा क्षेत्र में करीब पांच हजार से अधिक परिवार निवास करते हैं। माना जा रहा है कि पुनर्वास, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास, मुआवजा और प्रशासनिक कार्रवाई की गति—ये सभी मुद्दे चुनावी विमर्श का केंद्र बन सकते हैं।
वोट गणित पर सीधा असर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस क्षेत्र के मतदाता हल्द्वानी विधानसभा सीट के परिणाम को निर्णायक रूप से प्रभावित करते रहे हैं। 2022 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी और वर्तमान विधायक सुमित हृदयेश को 50,116 मत प्राप्त हुए थे और उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को 7,814 मतों से पराजित किया था। बताया जाता है कि बनभूलपुरा क्षेत्र से लगभग 36 हजार मत निर्णायक भूमिका में रहे। यदि पुनर्वास के बाद बड़ी संख्या में परिवार क्षेत्र से बाहर बसाए जाते हैं, तो अनुमान है कि 15 से 18 हजार मतदाताओं का सीधा असर वोट गणित पर पड़ सकता है। इससे पारंपरिक वोट बैंक में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
संतोष या असंतोष तय करेगा रुख
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पुनर्वास प्रक्रिया किस प्रकार और कितनी पारदर्शिता से पूरी होती है, यह भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करेगा। यदि परिवार संतुष्ट रहे तो इसका लाभ सत्ताधारी दल को मिल सकता है, जबकि असंतोष की स्थिति विपक्ष के लिए अवसर बन सकती है। सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद ईद के पश्चात पुनर्वास शिविर लगाए जाने और पात्रता जांच की प्रक्रिया तेज होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि पुनर्वास, मुआवजा और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था कितनी प्रभावी और न्यायसंगत होती है। फिलहाल इतना तय है कि बनभूलपुरा पुनर्वास मुद्दा 2027 के विधानसभा चुनाव में हल्द्वानी सीट पर एक प्रमुख चुनावी कारक बन सकता है।


