नैनीताल। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर सोमवार को जनपदभर में संचालित होम स्टे और गेस्ट हाउसों के खिलाफ व्यापक छापामारी अभियान चलाया गया। प्रशासनिक टीमों द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में बड़ी संख्या में अनियमितताएं सामने आईं।
उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की संयुक्त टीमों ने जिलेभर में कुल 197 होम स्टे और गेस्ट हाउसों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान 169 प्रतिष्ठान नियमों के विपरीत संचालित पाए गए। इनमें 44 होम स्टे बिना पंजीकरण के चल रहे थे, जबकि 125 होम स्टे निर्धारित मानकों और होम स्टे नियमावली-2015 की मंशा के खिलाफ संचालित मिले।
निरीक्षण में सामने आया कि कई होम स्टे में निजी पार्किंग की सुविधा नहीं थी। अनेक स्थानों पर स्वामी मौके पर निवासरत नहीं मिले और संचालन अन्य लोगों के माध्यम से किया जा रहा था। कई होम स्टे में स्वयं का किचन भी नहीं मिला तथा बाहर से भोजन की व्यवस्था की जा रही थी। इसके अलावा कुछ प्रतिष्ठानों को लीज पर देकर बाहरी राज्यों के लोगों द्वारा व्यवसायिक रूप से संचालित किए जाने की बात भी सामने आई।

नैनीताल शहर के सभी 16 होम स्टे में मिली अनियमितता
नैनीताल शहर में एसडीएम नवाजिश खालिक और राजस्व पुलिस की टीम ने तल्लीताल बूचड़खाना, प्राणी उद्यान मार्ग और मल्लीताल मोहन को चौराहा क्षेत्र में 16 होम स्टे पर छापा मारा। जांच में पाया गया कि कोई भी होम स्टे नियमावली-2015 के मानकों पर खरा नहीं उतरा। सभी स्थानों पर पार्किंग, किचन और स्वामी की उपस्थिति से जुड़ी गंभीर कमियां मिलीं।
राजस्व नुकसान और नियमों की अनदेखी पर सख्ती
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि होम स्टे योजना का उद्देश्य स्थानीय लोगों को रोजगार देना, स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। लेकिन कई स्थानों पर बाहरी राज्यों के लोग इसे व्यावसायिक गतिविधि के रूप में संचालित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि घरेलू बिजली-पानी कनेक्शन का उपयोग कर जीएसटी भुगतान से बचा जा रहा है, जिससे राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है।
जिलाधिकारी ने बताया कि सभी अनियमितताओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। 169 अनियमित होम स्टे और गेस्ट हाउसों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर लाइसेंस निरस्तीकरण सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन सुनिश्चित कराने और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

