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पहाड़ की बेटी ने जीती मौत की जंग: गुलदार के हमले के बाद डॉक्टरों ने बचाई जान….

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हल्द्वानी – उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में जंगल और जंगली जानवरों का खतरा आज भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। घास, लकड़ी और पशुओं के चारे के लिए रोज़ जंगल जाने वाले लोगों को कई बार जानलेवा हालात का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही एक दर्दनाक घटना 1 मार्च 2026 को बराकोट क्षेत्र में सामने आई, जब जंगल में घास काटने गई एक महिला पर गुलदार ने हमला कर दिया।

हमले में महिला तुलशी गंभीर रूप से घायल हो गईं। गुलदार के हमले से उनके सिर, चेहरे, गर्दन, कंधे, छाती और पीठ पर गहरे घाव हो गए। सिर के पीछे की त्वचा उखड़ गई, दोनों कानों को गंभीर नुकसान पहुंचा और चेहरे की नसों पर भी असर पड़ा। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया।

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स्थानीय लोगों की मदद से घायल महिला को तुरंत लोहाघाट उप जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार, टीकाकरण और एंटी-रेबीज की पहली खुराक दी गई। हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत हल्द्वानी स्थित चंदन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उपचार शुरू किया। डॉ. सारिका गंगवार के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने गंभीर चोटों को देखते हुए संवेदनशीलता और विशेषज्ञता के साथ इलाज की जिम्मेदारी संभाली। 2 मार्च को घावों की सफाई और प्राथमिक डिब्राइडमेंट की प्रक्रिया की गई।

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इसके बाद 11 मार्च को डॉक्टरों की टीम ने जटिल सर्जरी करते हुए रोटेशन एडवांसमेंट फ्लैप तकनीक का इस्तेमाल कर चेहरे के क्षतिग्रस्त हिस्से को सफलतापूर्वक कवर किया। सर्जरी के दौरान मांसपेशियों और त्वचा के फ्लैप की मदद से चेहरे के बड़े सॉफ्ट टिश्यू डिफेक्ट को ठीक किया गया।

चंदन हॉस्पिटल की अनुभवी टीम, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और सतर्क देखरेख के चलते मरीज की हालत में लगातार सुधार हुआ। फिलहाल महिला की स्थिति स्थिर है और उन्हें सॉफ्ट डाइट के साथ चिकित्सकीय सलाह देकर अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है।

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मरीज और उनके परिजनों ने आयुष्मान योजना के तहत मिले निशुल्क उपचार और अस्पताल की पूरी टीम, विशेष रूप से डॉ. सारिका गंगवार का आभार जताया। उनका कहना है कि यदि आयुष्मान योजना और डॉक्टरों का सहयोग नहीं मिलता तो इतना बड़ा इलाज संभव नहीं हो पाता।

यह घटना पहाड़ के उन हजारों परिवारों की वास्तविकता को भी सामने लाती है, जो रोज़ जंगलों में जंगली जानवरों के खतरे के बीच अपनी आजीविका के लिए संघर्ष करते हैं। ऐसे में आयुष्मान योजना और चंदन हॉस्पिटल जैसे संस्थान जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आ रहे हैं।