उत्तराखण्ड क्राइम हल्द्वानी

बनभूलपुरा रेलवे भूमि प्रकरण: 28 अप्रैल को अगली सुनवाई…..

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हल्द्वानी- बनभूलपुरा रेलवे भूमि मामले में 24 फरवरी को हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी किया है। आदेश की प्रति स्थानीय स्तर पर संबंधित पक्षों को प्राप्त हो चुकी है। न्यायालय ने पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर कई अहम बिंदुओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

पात्र–अपात्रों की सूची तैयार करने के निर्देश

न्यायालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत पुनर्वास के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत शिविरों में आवेदकों की पात्रता और अपात्रता की अलग-अलग सूची तैयार की जाएगी। उत्तराखंड राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (यूएसएलएसए) राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर शिविर लगाएगा। साथ ही एक अलग विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी, जिसमें प्रभावित परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का उल्लेख होगा।

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19 से 31 मार्च तक आवेदन शिविर

कोर्ट के आदेशानुसार 19 मार्च से 31 मार्च तक आवेदन शिविर आयोजित किए जाएंगे। न्यायालय ने कहा कि मौजूदा गतिरोध को अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता। पिछली सुनवाई में करीब 30.040 हेक्टेयर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण का उल्लेख किया गया था, जहां लगभग 4,365 आवास बने होने की बात सामने आई थी।

प्रभावित परिवारों को अनुग्रह राशि का प्रस्ताव

रेलवे और राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि संरचनाओं के विध्वंस की स्थिति में प्रत्येक परिवार के मुखिया को प्रति माह 2,000 रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। हालांकि, अपीलकर्ताओं के अधिवक्ता ने पुनर्वास के अधिकार और रेलवे परियोजना के लिए भूमि की आवश्यकता को लेकर आपत्तियां दर्ज कीं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कब्जाधारियों को अतिक्रमणकारी बताया। सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने माना कि बड़ी संख्या में परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अंतर्गत आ सकते हैं।

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सभी प्रभावितों को आवेदन का अवसर

न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि सभी प्रभावित परिवारों से शिविर में आवेदन कराया जाए। आवश्यकता पड़ने पर एक से अधिक शिविर आयोजित किए जाएं और प्रक्रिया 31 मार्च से पहले पूर्ण की जाए। योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए एनजीओ और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद लेने की भी अनुमति दी गई है। अब 28 अप्रैल की सुनवाई में पुनर्वास प्रक्रिया और तैयार की गई रिपोर्ट पर आगे की दिशा तय होगी।

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