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जीवनरेखा बनी सड़क बनी परेशानी, गोलापार के लोग बेहाल….

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हल्द्वानी – हल्द्वानी के गोलापार मार्ग पर आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़क को दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक सड़क की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हो पाया है। क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली यह सड़क अब गड्ढों, धूल और अव्यवस्था का प्रतीक बन चुकी है। हैरानी की बात यह है कि सांसद द्वारा चार बार निरीक्षण किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य की गति में कोई खास तेजी नहीं आई है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते दो वर्षों से वे धूल, कीचड़ और जर्जर रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और किसानों को रोजाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है और हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

गोलापार क्षेत्रवासियों ने कार्यदायी एजेंसी पर लापरवाही और उदासीनता के गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि न तो निर्माण कार्य की तय समय-सीमा का पालन किया जा रहा है और न ही गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है। हर निरीक्षण के बाद केवल आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। जनता अब सवाल उठा रही है कि आखिर दो वर्षों में भी एक महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण क्यों पूरा नहीं हो सका।

बढ़ती नाराज़गी के बीच अब गोलापार क्षेत्र के लोगों ने मांग तेज कर दी है कि पूरे मामले का निरीक्षण कुमाऊं कमिश्नर द्वारा कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसी की जवाबदेही तय हो। लोगों का कहना है कि उच्चस्तरीय जांच से ही सच्चाई उजागर होगी और समस्या का स्थायी समाधान संभव हो पाएगा। फिलहाल गोलापार की जनता सब्र के आखिरी मोड़ पर खड़ी है। क्षेत्रवासियों का साफ कहना है कि अब वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि सड़क निर्माण कार्य में ठोस प्रगति और जिम्मेदारों पर कार्रवाई चाहते हैं।

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