बागेश्वर – उत्तराखंड के बागेश्वर में इंग्लैंड के निवासी और प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक डेविड हापकिंस को हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम विदाई दी गई। सरयू–गोमती नदी के संगम पर उनकी बेटी दीपिका हापकिंस ने चिता को मुखाग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार किया। इस दौरान क्षेत्र के कई लोग और आश्रम से जुड़े लोग नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।
मूल रूप से इंग्लैंड के रहने वाले डेविड हापकिंस वर्ष 1973 में भारत आए थे और तब से उन्होंने कौसानी स्थित लक्ष्मी आश्रम को अपनी कर्मभूमि बना लिया था। आश्रम से जुड़े रहते हुए उन्होंने ग्रामीण विकास, महिला शिक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
डेविड हापकिंस उत्तराखंड की संस्कृति, पहाड़, जंगल और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी लगातार सक्रिय रहे। उनके कार्यों से स्थानीय समाज में गहरा प्रभाव पड़ा और लोग उन्हें एक सादगीपूर्ण तथा समर्पित समाजसेवी के रूप में जानते थे।

सोमवार को कौसानी स्थित लक्ष्मी आश्रम में उनके निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर बागेश्वर लाया गया, जहां सरयू और गोमती नदियों के संगम स्थल पर हिंदू रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, आश्रम से जुड़े कार्यकर्ता और क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
डेविड हापकिंस का जीवन भारतीय संस्कृति, समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। उनकी सेवाओं को लोग लंबे समय तक याद करेंगे।

