रुद्रपुर – उत्तराखंड देवभूमि में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रुद्रपुर में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। जनपद मुख्यालय स्थित गांधी पार्क में आयोजित मुख्य कार्यक्रम का शुभारंभ वर्चुअल माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर यूसीसी के क्रियान्वयन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित भी किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि 27 जनवरी का दिन उत्तराखंड के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। इसी दिन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू हुई, जिससे सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति सदैव समरसता और समानता की संवाहक रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद-44 के अंतर्गत समान नागरिक संहिता को राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में शामिल किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने का संकल्प लिया गया। 7 फरवरी 2024 को यूसीसी विधेयक विधानसभा से पारित हुआ और 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद सभी प्रक्रियाएं पूर्ण कर 27 जनवरी 2025 को इसे विधिवत लागू किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू होने से सभी नागरिकों को समान अधिकार मिले हैं और महिला सशक्तिकरण के एक नए युग की शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में हलाला या बहुविवाह का कोई मामला सामने नहीं आया, जिससे मुस्लिम महिलाओं ने इस कानून का स्वागत किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म या पंथ के विरुद्ध नहीं है, बल्कि समाज की कुप्रथाओं को समाप्त कर समानता और समरसता स्थापित करने का कानूनी प्रयास है। इस कानून में विवाह, विवाह-विच्छेद, उत्तराधिकार, संपत्ति विभाजन और बाल अधिकारों को लेकर सभी धर्मों के लिए समान नियम बनाए गए हैं। संपत्ति के अधिकार में बच्चों के बीच किसी प्रकार का भेद नहीं किया गया है और मृतक की संपत्ति पर पत्नी, बच्चों व माता-पिता को समान अधिकार दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिव-इन रिलेशनशिप में पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है। लिव-इन से जन्मे बच्चों को जैविक संतान के समान सभी अधिकार दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की संख्या प्रतिदिन औसतन 67 से बढ़कर 1400 से अधिक हो गई है। बीते एक वर्ष में यूसीसी के अंतर्गत लगभग पांच लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत से अधिक का निस्तारण किया जा चुका है।
इस अवसर पर महापौर विकास शर्मा और राज्य मंत्री फरजाना बेगम ने यूसीसी की वर्षगांठ पर सभी को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने यूसीसी लागू कर देश में मिसाल कायम की है और यह कानून सभी वर्गों, विशेषकर महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करता है। कार्यक्रम में जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया सहित अन्य अधिकारियों ने यूसीसी के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले रजिस्ट्रार, सब-रजिस्ट्रार एवं अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।
जनपद की सभी तहसीलों में आयोजित कार्यक्रमों के अंतर्गत कुल 892 यूसीसी प्रमाण पत्र निर्गत किए गए, जिनमें बाजपुर, सितारगंज, किच्छा, रुद्रपुर, गदरपुर, खटीमा, काशीपुर और जसपुर तहसीलें शामिल रहीं। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी, जिला पंचायतराज अधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, उप जिलाधिकारी, नगर निगम अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में क्षेत्रीय जनता उपस्थित रही।

