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क्रालोस के नौवें सम्मेलन में गूंजे जनहित के मुद्दे, पीपी आर्या को फिर मिली अध्यक्ष की कमान

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हल्द्वानी – क्रालोस का नौवां सम्मेलन उत्साह, ऊर्जा और संघर्ष के संकल्प के साथ संपन्न हो गया। सम्मेलन के दूसरे एवं अंतिम दिन विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर सात महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इस दौरान पीपी आर्या को पुनः संगठन का अध्यक्ष चुना गया, जबकि भोपाल को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।

सम्मेलन में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ जनवादी अधिकारों पर बढ़ते हमलों, निरंकुशता, युद्धों के विरोध, संवैधानिक अधिकारों के हनन, हालिया छात्र-युवा आंदोलनों तथा एसआईआर के माध्यम से नागरिकता और मताधिकार पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए। इसके अलावा अपराध और अतिक्रमण के नाम पर बस्तियों, मकानों एवं दुकानों को ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई के खिलाफ भी आवाज बुलंद की गई।

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सम्मेलन में अंकिता हत्याकांड के कथित आरोपी वीआईपी को पुरस्कृत किए जाने तथा सीबीआई जांच की आड़ में गवाहों को डराने-धमकाने के आरोपों की कड़ी निंदा की गई। वक्ताओं ने न्याय के लिए जारी संघर्ष को और मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

खुले सत्र में मजदूर, किसान और जनसंगठनों ने उठाए जनहित के मुद्दे

दोपहर दो बजे सम्मेलन का खुला सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों, ट्रेड यूनियनों, मजदूर संगठनों और जनवादी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। सत्र को यजाकी वर्कर्स यूनियन, इंटक मजदूर संगठन (पंतनगर), एरा श्रमिक संगठन, ठेका मजदूर कल्याण समिति, पीयूसीएल, अंबेडकर फाउंडेशन मिशन, सीएसटीयू, डॉल्फिन मजदूर संगठन, कारोलिया लाइटिंग मजदूर यूनियन, एलआईसी कुमाऊं मंडल, बेलराइज एप्लाइन यूनियन, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, भाकपा (माले), पीपीआईडी, इंकलाबी मजदूर केंद्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। सामाजिक कार्यकर्ता साजिद खान ने भी अपने विचार रखे।

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वक्ताओं ने एसआईआर के जरिए नागरिकता और मताधिकार पर किए जा रहे कथित हमलों पर गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सभी संगठनों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। केंद्र की मोदी सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों की नीतियों की आलोचना करते हुए वक्ताओं ने मजदूरों को श्रम संहिताओं के माध्यम से अधिकारों से वंचित किए जाने के खिलाफ संगठित आंदोलन की आवश्यकता पर जोर दिया।

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वक्ताओं ने अपराध और अतिक्रमण के नाम पर बड़े पैमाने पर बस्तियों, मकानों एवं दुकानों को ध्वस्त किए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयों के खिलाफ जनता को जागरूक और संगठित करना समय की जरूरत है।

जुलूस निकालकर संघर्ष का लिया संकल्प

खुले सत्र के समापन के बाद सम्मेलन स्थल से जुलूस निकाला गया। जुलूस नारायण कॉलोनी, शिमला बहादुर और तीनपानी डैम होते हुए पुनः सम्मेलन स्थल पर पहुंचकर संपन्न हुआ। इसके साथ ही क्रालोस के नौवें सम्मेलन का समापन किया गया।

खुले सत्र को पीपी आर्या, कैलाश भट्ट, मुकुल, प्रभात ध्यानी, दलजीत सिंह, ललित मटियाली, एडवोकेट यशपाल सिंह, हरीश मौर्य, साजिद खान, महेश, बिंदु गुप्ता, रजनी और पिंकी सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।