उत्तराखण्ड कोटद्वार क्राइम

‘बाबा’ नाम विवाद में राजनीति तेज, दीपक पर FIR को बताया गया अन्याय……

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कोटद्वार- कोटद्वार में गणतंत्र दिवस के दिन एक मुस्लिम व्यापारी की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द को लेकर हुए विवाद में दर्ज एफआईआर ने अब राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कार्रवाई को अन्यायपूर्ण और पक्षपातपूर्ण बताया है।

हरीश रावत ने आरोप लगाया कि घटना के दौरान बाहर से आए लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करते समय स्थानीय युवक दीपक कुमार को ही नामजद आरोपी बना दिया, जबकि अन्य लोगों को 30–40 अज्ञात आरोपियों की श्रेणी में डाल दिया गया।

“नामजद आरोपी सिर्फ दीपक, बाकी अज्ञात—यह कैसा न्याय?”

पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब दीपक कुमार ने अपनी लिखित शिकायत में 8 लोगों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज कराए थे और घटनास्थल के वीडियो में अराजकता फैलाने वालों के चेहरे साफ दिखाई दे रहे हैं, तो उन्हें अज्ञात क्यों बताया गया।
उन्होंने कहा, “यह कैसी पुलिसिंग है, जहां सबूत सामने होने के बावजूद असली दोषियों को बचाया जा रहा है और जिसे शांति कायम करनी थी, उसी को कटघरे में खड़ा कर दिया गया।”

“जिसे सम्मानित किया जाना चाहिए था, उसी पर FIR”

हरीश रावत ने कहा कि दीपक कुमार की भूमिका पूरे घटनाक्रम में संवाद और शांति बनाए रखने की थी। “जिसे सम्मानित किया जाना चाहिए था, उसी पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया। इससे समाज में यह संदेश जाता है कि सच और इंसानियत के पक्ष में खड़े लोगों को ही सजा मिलती है।”

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उन्होंने चेताया कि इस तरह की कार्रवाई राज्य की सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे के लिए खतरनाक है। “नफरत फैलाना किसी दल का एजेंडा हो सकता है, लेकिन यह उत्तराखंड की संस्कृति और पहचान नहीं है,” उन्होंने कहा।

दीपक कुमार: इंसानियत की आवाज या आरोपी?

इस पूरे विवाद के केंद्र में रहे दीपक कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वे खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताते हुए एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार और विरोध कर रहे बजरंग दल के सदस्यों के बीच खड़े नजर आए। इस वीडियो के बाद दीपक को सोशल मीडिया पर इंसानियत और सामाजिक सौहार्द की आवाज के रूप में देखा जाने लगा।

दीपक ने कहा, “मुझे अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। नतीजों का डर नहीं है। जब भी जरूरत होगी, मैं फिर इंसानियत के लिए खड़ा रहूंगा।”

सोशल मीडिया पर जबरदस्त उछाल

घटना के बाद दीपक की सोशल मीडिया लोकप्रियता में भारी उछाल आया—

  • फेसबुक: 26 जनवरी से पहले करीब 1,500 फॉलोअर्स, अब 3 लाख से अधिक
  • इंस्टाग्राम: करीब 1,000 फॉलोअर्स से बढ़कर 5 लाख से ज्यादा
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हालांकि, इसके साथ ही दबाव और खतरे की आशंका भी बढ़ी है।

“समस्या स्थानीय नहीं, बाहर से आई”—दीपक का दावा

दीपक का कहना है कि असली परेशानी स्थानीय लोगों से नहीं, बल्कि बाहर से आए 30–40 लोगों से हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि 31 जनवरी को देहरादून और ऋषिकेश से आए लोगों ने उनके जिम और घर के बाहर प्रदर्शन किया, सांप्रदायिक नारे लगाए और परिवार के सामने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की—वह भी पुलिस की मौजूदगी में।

FIR का पूरा मामला

पुलिस ने 31 जनवरी की रात कुल तीन एफआईआर दर्ज कीं—

  • एक एफआईआर दीपक कुमार और विजय रावत के खिलाफ, बजरंग दल के सदस्य कमल पाल की शिकायत पर
  • दूसरी एफआईआर दुकानदार की शिकायत पर, जिसमें बजरंग दल से जुड़े दो कार्यकर्ताओं समेत चार लोग नामजद
  • तीसरी एफआईआर पुलिस की ओर से, जिसमें करीब 40 लोगों पर सांप्रदायिक नारेबाजी, सड़क जाम और धार्मिक वैमनस्य फैलाने के आरोप

विजय रावत ने आरोप लगाया कि उन्होंने लिखित शिकायत में नाम और वाहनों के नंबर तक दिए, इसके बावजूद आरोपियों को अज्ञात रखा गया।

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पुलिस का पक्ष

कोटद्वार पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दीपक की शिकायत जांच में शामिल है और वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। अलग एफआईआर इसलिए दर्ज नहीं की गई क्योंकि मामला पहले से पंजीकृत था। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर दीपक को भारत का “हीरो” बताते हुए समर्थन जताया, वहीं कांग्रेस नेता विकास वर्मा ने इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया।

दुकानदार का बयान और पुलिस की अपील

दुकानदार शोएब अहमद ने कहा कि उनकी दुकान 42 साल पुरानी है और ‘बाबा’ नाम उन्होंने अपनी पसंद से रखा था। “पहले कभी किसी ने आपत्ति नहीं की। 26 जनवरी को अचानक नाम बदलने का दबाव बनाया गया।”

एएसपी चंद्र मोहन सिंह ने कहा कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है, फ्लैग मार्च और गश्त जारी है। उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया पर अफवाहें न फैलाने की अपील की है।

अब इस मामले में सबकी नजर इस पर टिकी है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इंसानियत के पक्ष में खड़े दीपक को न्याय मिल पाएगा या नहीं।