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आगामी चुनाव से पहले मतदाता सूची की बड़ी पड़ताल, लाखों मतदाता आयोग की रडार पर

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देहरादून – विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता गणना प्रपत्रों की जांच के दौरान सामने आई तकनीकी विसंगतियों को लेकर चुनाव आयोग अब अगले चरण की कार्रवाई की तैयारी में है। आयोग करीब 18 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। जिन मतदाताओं के प्रपत्रों में गंभीर विसंगतियां पाई जाएंगी, उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, एसआईआर के दौरान प्राप्त गणना प्रपत्रों की सॉफ्टवेयर के माध्यम से विस्तृत जांच की जा रही है। जांच में नाम, आयु और पारिवारिक विवरण से संबंधित कई तकनीकी विसंगतियां सामने आई हैं। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि सभी एसआईआर प्रपत्रों की पांच प्रमुख मानकों पर छंटनी की जा रही है। सामान्य एवं छोटी त्रुटियों को नजरअंदाज किया जाएगा, जबकि गंभीर विसंगति मिलने पर संबंधित मतदाता को नोटिस जारी किया जाएगा।

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उन्होंने बताया कि नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाता को सात से दस दिन के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ ही उसे अपने दावे के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध कराने होंगे। संतोषजनक जवाब मिलने के बाद ही संबंधित प्रकरण का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इन पांच प्रकार की विसंगतियों पर जारी होगा नोटिस

चुनाव आयोग ने जिन प्रमुख मानकों पर जांच की जा रही है, उनमें सबसे पहले नाम में अंतर शामिल है। यदि मतदाता अथवा उसके संबंधी के नाम में पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान विवरण में अंतर पाया जाता है तो नोटिस जारी किया जाएगा।

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दूसरा मानक न्यूनतम आयु अंतर है। यदि माता-पिता और मतदाता के बीच आयु का अंतर 15 वर्ष से कम पाया जाता है तो इसे विसंगति माना जाएगा।

तीसरा मानक अधिकतम आयु अंतर है। यदि माता-पिता और संतान के रूप में दर्ज मतदाता के बीच आयु का अंतर 50 वर्ष से अधिक पाया जाता है तो आयोग स्पष्टीकरण मांगेगा।

चौथा मानक प्रोजनी (संतान) की संख्या से जुड़ा है। यदि किसी एक मतदाता के साथ छह से अधिक संतान की मैपिंग दर्ज है तो मामले की जांच की जाएगी।

पांचवां मानक पीढ़ीगत आयु अंतर है। यदि दादा-दादी अथवा नाना-नानी और मतदाता के बीच आयु का अंतर 40 वर्ष से कम पाया जाता है तो भी संबंधित मतदाता को नोटिस जारी किया जाएगा।

मतदाताओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था

नोटिसों पर सुनवाई के लिए चुनाव आयोग ने विशेष व्यवस्था भी की है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि सभी मतदाताओं को सीधे निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) अथवा उपजिलाधिकारी कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

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उन्होंने बताया कि प्रत्येक आठ से दस मतदान केंद्रों पर एक सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) की तैनाती की जाएगी, जो स्थानीय स्तर पर ही सुनवाई करेंगे। इससे मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से राहत मिलेगी और मामलों का समयबद्ध निस्तारण भी संभव हो सकेगा।

चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव निष्पक्ष और विश्वसनीय मतदाता सूची के आधार पर संपन्न कराए जा सकें।