नैनीताल – सुरों की दुनिया की महान गायिका आशा भोसले भले ही इस दुनिया से विदा हो गई हों, लेकिन उनके गीत आज भी नैनीताल और उत्तराखंड की वादियों में गूंजते प्रतीत होते हैं। उनकी सुरीली आवाज ने इन पहाड़ों की खूबसूरती को हमेशा के लिए अमर कर दिया।
उनके गाए कई गीतों में नैनीताल की वादियों का जादू साफ झलकता है। फिल्म गुमराह का मशहूर गीत “इन हवाओं में, इन फिजाओं में…”, “दिन हैं बहार के” और “जिंदगी के रंग कई रे” जैसे गीत आज भी लोगों को उस दौर में ले जाते हैं, जब इन वादियों में फिल्मों की शूटिंग हुआ करती थी।
फिल्म कटी पतंग का लोकप्रिय गीत “मेरा नाम है शबनम…” भी नैनीताल में फिल्माया गया, जिसने इस शहर की पहचान को और मजबूत किया। वहीं फिल्म बेटी का गीत “लहंगा मंगा दे मेरे बाबू आज नैनीताल से…” ने इस पहाड़ी शहर को देशभर में खास पहचान दिलाई।

रानीखेत में फिल्माई गई फिल्मों के गीतों में भी उनकी आवाज की छाप देखने को मिलती है। दिल दे के देखो और हनीमून जैसी फिल्मों के गीतों ने उत्तराखंड की सुंदरता को और निखारा।
आशा भोसले का उत्तराखंड की संस्कृति से गहरा लगाव था। उन्होंने गढ़वाली फिल्म ग्वेर छोरा के लिए “जनमो को साथ छे” जैसा भावपूर्ण गीत भी गाया, जो आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। उनकी आवाज भले ही खामोश हो गई हो, लेकिन उनके गीत हमेशा नैनीताल की वादियों में गूंजते रहेंगे और उन्हें अमर बनाए रखेंगे।

