उत्तराखण्ड ज़रा हटके भीमताल

भीमताल ब्लॉक में कचरा प्रबंधन पर विस्तृत अध्ययन, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बनेगी कार्ययोजना

ख़बर शेयर करें -

भीमताल – भीमताल विकासखंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए खंड विकास कार्यालय एवं नीलकंठ जीरो वेस्ट सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल परिसर के विद्यार्थियों ने विस्तृत बेसलाइन वेस्ट सर्वे पूरा किया है। सर्वे से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए व्यवहारिक एवं वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी।

इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत बीबीए तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं की छह सदस्यीय टीम ने भीमताल नगर पालिका क्षेत्र के सभी नौ वार्डों तथा विकासखंड की सांगुड़ीगांव, मेहरागांव और रानीबाग न्याय पंचायतों के 23 गांवों में 304 परिवारों के बीच घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया। इस दौरान कचरा उत्पादन, संग्रहण व्यवस्था, स्रोत पर कचरा पृथक्करण, निस्तारण के तरीके, पर्यावरणीय जागरूकता, नागरिक संतुष्टि और उपयोगकर्ता शुल्क देने की इच्छा जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी जुटाई गई।

यह भी पढ़ें 👉  6.93 लाख मतदाताओं की प्रारूप सूची जारी, 15 सितंबर को होगा अंतिम प्रकाशन

शहरी क्षेत्र में बेहतर व्यवस्था, गांवों में अब भी पारंपरिक प्रणाली

सर्वेक्षण में सामने आया कि भीमताल नगर पालिका क्षेत्र में प्रतिदिन औसतन 8.4 टन ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जो पर्यटन सीजन में बढ़कर करीब 9 टन प्रतिदिन तक पहुंच जाता है। नगर पालिका के नौ वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की नियमित व्यवस्था है और अधिकांश परिवार स्रोत पर ही कचरे का पृथक्करण करते हैं। हालांकि भूमि की कमी के कारण नगर क्षेत्र में अभी तक कचरा प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित नहीं हो पाया है, जिसके चलते एकत्रित कचरे का निस्तारण हल्द्वानी स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में किया जाता है।

वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित कचरा संग्रहण व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकांश परिवार पारंपरिक तरीकों पर निर्भर हैं। सर्वे के अनुसार जैविक कचरे का उपयोग मुख्य रूप से पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है, जबकि प्लास्टिक, कांच और अन्य सूखे कचरे का निस्तारण कई स्थानों पर खुले में फेंकने या जलाने के माध्यम से किया जा रहा है, जो पर्यावरणीय दृष्टि से चिंता का विषय है।

यह भी पढ़ें 👉  सरकारी कर्मचारी बनकर पहुंचे लुटेरे, बुजुर्ग महिला से मारपीट कर जेवर लूटे

ग्रामीणों ने दिखाई सहयोग की इच्छा

सर्वेक्षण के दौरान कई ग्रामीण परिवारों ने बताया कि यदि नियमित कचरा संग्रहण व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तो वे लगभग 50 रुपये प्रतिमाह उपयोगकर्ता शुल्क देने के लिए तैयार हैं। वहीं कुछ परिवारों ने वर्तमान पारंपरिक व्यवस्था को ही पर्याप्त बताया।

ग्राम प्रधानों ने रखे सुझाव

सर्वे के दौरान डुनसिल एवं चकबहेड़ी ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अलग बजट, सफाई कर्मियों की नियुक्ति तथा कचरा संग्रहण वाहनों की उपलब्धता की आवश्यकता बताई। वहीं अमिया एवं खैरोला पांडे ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने मौजूदा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।

यह भी पढ़ें 👉  वर्षाकाल में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, हाई-रिस्क गर्भवतियों और डेंगू रोकथाम पर फोकस

वैज्ञानिक मॉडल विकसित करने की तैयारी

खंड विकास अधिकारी हर्षित गर्ग ने बताया कि सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़े ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित करने में अहम भूमिका निभाएंगे। प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत सामुदायिक डस्टबिन स्थापित करने, स्रोत पर कचरा पृथक्करण को बढ़ावा देने, प्लास्टिक कचरा जलाने की प्रवृत्ति रोकने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाने, पुनर्चक्रण व्यवस्था विकसित करने तथा भविष्य में नगर पालिका की कचरा संग्रहण सेवाओं का आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक चरणबद्ध विस्तार करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

उन्होंने इस पहल में सहयोग देने वाले नीलकंठ जीरो वेस्ट सोसाइटी, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं तथा सभी सहयोगियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का एक प्रभावी एवं स्थायी मॉडल विकसित किया जा सकेगा।