हल्द्वानी – राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से हल्द्वानी में लाइवलीहुड एंड एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोग्राम (एलईडीपी) का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा क्षेत्र के सांसद अजय भट्ट ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने भागीदारी की।
कार्यक्रम में नाबार्ड नैनीताल के जिला विकास प्रबंधक मुकेश बेलवाल, लीड जिला प्रबंधक अमित बाजपेयी, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक, नैनीताल जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक, विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधक, बैंक अधिकारी एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लगभग 120 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने प्रतिभाग किया।
नाबार्ड द्वारा यह कार्यक्रम हल्द्वानी स्थित गैर-सरकारी संस्था ‘महिला पिछड़ा वर्ग समिति’ को दो वर्षों के लिए स्वीकृत किया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों को कढ़ाई एवं एप्लीक कार्य का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में सशक्त बनाना है।

कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 90 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को उन्नत कढ़ाई एवं एप्लीक तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। साथ ही एक्सपोजर विजिट, डेमोंस्ट्रेशन यूनिट की स्थापना, विपणन आउटलेट्स का विकास तथा बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी, जिससे महिलाएं अपना स्वयं का उद्यम स्थापित कर सकें।
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के लिए नाबार्ड द्वारा लगभग 10 लाख रुपये की अनुदान सहायता स्वीकृत की गई है।
अपने संबोधन में सांसद अजय भट्ट ने महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए नाबार्ड के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कौशल विकास और उद्यमिता आधारित ऐसे कार्यक्रम महिलाओं की आय बढ़ाने, आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक मुकेश बेलवाल ने कहा कि एलईडीपी कार्यक्रम सतत आजीविका सृजन, महिला उद्यमिता विकास और स्वयं सहायता समूह आधारित आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड ग्रामीण क्षेत्रों में क्षमता निर्माण, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता विकास के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।
कार्यक्रम को महिला सशक्तिकरण, आय सृजन और स्थानीय आर्थिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।

