उत्तराखण्ड क्राइम देहरादून

दिनदहाड़े हत्या, मूकदर्शक बना सिस्टम और खामोश होती गई गुंजन……

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देहरादून– राजधानी के दूल्हा बाजार इलाके में सोमवार को दिनदहाड़े हुई गुंजन की निर्मम हत्या ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। सरेआम हुई इस वारदात से क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों बाद इलाके में इस तरह की हत्या हुई है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि यदि पुलिस समय रहते उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेती, तो आज गुंजन जिंदा होती।

परिजनों के अनुसार गुंजन की जान को खतरा बताते हुए उन्होंने महज तीन दिन पहले खुड़बुड़ा चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इससे पहले भी आरोपी आकाश और गुंजन के बीच विवाद की जानकारी पुलिस को दी गई थी। करीब आठ महीने पहले दोनों के बीच हुए विवाद के बाद पुलिस ने केवल समझाइश देकर मामला शांत करा दिया था। बार-बार पुलिस के दरवाजे खटखटाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और अंततः यह मामला एक जघन्य हत्या में बदल गया।

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परिजनों ने बताया कि आरोपी आकाश शादीशुदा था और लंबे समय से गुंजन को परेशान कर रहा था। वह उसका पीछा करता और जान से मारने की धमकी देता था। तीन दिन पहले आरोपी ने खुलेआम एक अन्य व्यक्ति से कहा था कि वह गुंजन को मार देगा। इसके बाद भी जब परिजनों ने शिकायत दी, तो पुलिस न आरोपी से पूछताछ कर सकी और न ही कोई सुरक्षा व्यवस्था की गई।

घटना के दिन सरेबाजार गुंजन की चीखें करीब दस मिनट तक गली में गूंजती रहीं, लेकिन कोई भी उसे बचाने आगे नहीं आया। चश्मदीदों के मुताबिक आरोपी स्कूटर से आया, पहले बातचीत की और फिर अचानक चापड़ से हमला कर दिया। हमला करने के बाद वह हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गया। गली में बिखरा खून और दीवारों पर पड़े छींटे हत्या की भयावहता को बयान कर रहे थे।

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मामले में कार्रवाई में लापरवाही बरतने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने खुड़बुड़ा चौकी इंचार्ज प्रद्युम्न नेगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पुलिस के अनुसार आरोपी आकाश पहले भी चोरी के मामले में जेल जा चुका है और डेढ़ महीने तक जेल में रहा था। इसके बावजूद वह बाजार में काम करता रहा, जिसको लेकर भी स्थानीय लोगों में रोष है।

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यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि शिकायतों को हल्के में लेना किस कदर घातक साबित हो सकता है। अब पूरे शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गुंजन को इंसाफ कब और कैसे मिलेगा।