उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार लागू होने जा रहा है। 1 जुलाई 2026 से राज्य में मदरसा बोर्ड भंग कर दिया जाएगा और सभी मदरसों को नई नियमावली के तहत संचालित करना अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़कर छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान करना है।
नई व्यवस्था के तहत किसी भी मदरसे को संचालित करने के लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक प्राधिकरण की धारा 14 के अंतर्गत तय 11 सख्त शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा।
11 अनिवार्य शर्तें

- छात्र और शिक्षक को धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा
- केवल मान्यता प्राप्त डिग्रीधारी शिक्षकों की नियुक्ति
- संस्थान का संचालन अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा
- राज्य शिक्षा परिषद से संबद्धता अनिवार्य
- सोसायटी रजिस्ट्रार में पंजीकरण आवश्यक
- जमीन संस्थान/सोसायटी के नाम पर हो, व्यक्तिगत नहीं
- सभी वित्तीय लेनदेन संस्थान के बैंक खाते से ही
- सोसायटी के सभी सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय से हों
- प्राधिकरण और परिषद के निर्देशों का पूर्ण पालन
- सांप्रदायिक एवं सामाजिक सद्भाव बनाए रखना अनिवार्य
- 3 वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट, खेल मैदान और प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध होना
पढ़ाई का नया ढांचा
मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून काश्मी के अनुसार, अब मदरसों में पढ़ाई पूरी तरह राज्य शिक्षा बोर्ड के सिलेबस के अनुसार होगी।
- दिन में 6-7 पीरियड सामान्य विषयों के
- धार्मिक शिक्षा अलग समय (स्कूल के बाद) “पार्ट-2” में
इस बदलाव का मकसद छात्रों को आधुनिक शिक्षा और मुख्यधारा से जोड़ना है।
राज्य में मदरसों की स्थिति
- कुल मान्यता प्राप्त मदरसे: 482
- कुल छात्र संख्या: 50,000+
- देहरादून में मान्यता प्राप्त मदरसे: 36
अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जेएस रावत ने स्पष्ट किया कि 11 शर्तों को पूरा किए बिना किसी भी मदरसे को धार्मिक शिक्षा की मान्यता नहीं दी जाएगी।
छात्रों के भविष्य पर प्रभाव
- प्रमाण पत्र राज्य शिक्षा परिषद के तहत होंगे
- हाईस्कूल और इंटर के बराबर मान्यता
- अन्य स्कूलों और कॉलेजों में एडमिशन आसान
छोटे और बड़े मदरसों के लिए अलग व्यवस्था
- छोटे मदरसे (मकतब): प्राथमिक स्तर/कोचिंग सेंटर के नियम
- जूनियर/सीनियर मदरसे: उसी स्तर के अनुसार नियम
- शुरुआती दौर में अस्थायी मान्यता और समय देकर संस्थानों को नए नियमों के अनुरूप ढालने का अवसर
उत्तराखंड में यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और मुख्यधारा से जुड़ाव सुनिश्चित करने वाला बड़ा सुधार माना जा रहा है।

