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भोजन के साथ प्लास्टिक निगल रहे वन्यजीव? हाथी के गोबर में पन्नी मिलने से बढ़ी चिंता

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कालाढूंगी – जंगलों और वन्यजीवों के आसपास फैल रहा प्लास्टिक कचरा बेजुबान जानवरों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। कालाढूंगी क्षेत्र में हाथी के गोबर के बीच पीले रंग की प्लास्टिक की पन्नी दिखाई देने से वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह स्थिति जंगलों और वन क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के पहुंचने तथा उसके वन्यजीवों के शरीर में जाने के संभावित खतरे को उजागर करती है।

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भोजन की तलाश में आबादी तक पहुंचते हैं हाथी

नेचर गाइड एवं कॉर्बेट ग्राम विकास समिति के सचिव मोहन पांडे के अनुसार, हाथी भोजन की तलाश में जंगलों के अलावा कई बार आबादी वाले क्षेत्रों, सड़कों और कूड़ा डालने वाली जगहों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे स्थानों पर खुले में पड़ी प्लास्टिक की थैलियां, खाद्य पदार्थों के पैकेट और अन्य कचरा उनके लिए खतरा बन सकते हैं। भोजन के साथ प्लास्टिक निगलने की आशंका से वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

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पाचन तंत्र में रुकावट पैदा कर सकता है प्लास्टिक

विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्टिक निगलने से वन्यजीवों के पाचन तंत्र में रुकावट पैदा हो सकती है। इससे भोजन के पाचन में बाधा आने और आंतों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। लंबे समय तक प्लास्टिक शरीर में रहने पर जानवरों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

जंगलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने की जरूरत

वन्यजीवों को ऐसे खतरे से बचाने के लिए जंगलों के आसपास और आबादी क्षेत्रों में कचरे का उचित निस्तारण जरूरी है। खुले में प्लास्टिक और खाद्य पदार्थों के पैकेट फेंकने से बचना चाहिए। स्थानीय लोगों, पर्यटकों और दुकानदारों की जागरूकता से प्लास्टिक कचरे को जंगलों तक पहुंचने से रोकने में मदद मिल सकती है।