मुंबई/गोवा – हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह गोवा के डोना पाउला स्थित अपने आवास पर बेहोशी की हालत में मिले थे। उन्हें तत्काल मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें होश में नहीं लाया जा सका। अस्पताल सूत्रों के अनुसार उन्हें सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित किया गया।
नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। अस्पताल की ओर से उनकी मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया है।
करीब पांच दशक का शानदार फिल्मी सफर
नाना पाटेकर का जन्म विश्वनाथ पाटेकर के रूप में महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने रंगमंच से अभिनय की शुरुआत की और वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से सिनेमा में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई।

वर्ष 1986 में आई ‘अंकुश’ ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इसके बाद ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘खामोशी’ और ‘अग्नि साक्षी’ समेत कई फिल्मों में उनके अभिनय ने दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान खींचा। उनकी संवाद अदायगी, आवाज और किरदारों को जीवंत करने की शैली उन्हें अपने दौर के विशिष्ट अभिनेताओं में शामिल करती रही।
गंभीर किरदारों से कॉमेडी तक छाई अलग पहचान
नाना पाटेकर ने अपने लंबे करियर में केवल गंभीर भूमिकाएं ही नहीं निभाईं, बल्कि खलनायक और हास्य किरदारों में भी अपनी छाप छोड़ी। फिल्म ‘परिंदा’ में उनके अभिनय को खूब सराहा गया। वहीं बाद के वर्षों में ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी के किरदार ने उन्हें नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी खास पहचान दिलाई।
वह अभिनेता के साथ-साथ निर्देशक और रंगमंच से जुड़े कलाकार भी रहे। उनकी फिल्म ‘प्रहार : द फाइनल अटैक’ को भी उनके महत्वपूर्ण कार्यों में गिना जाता है। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
आखिरी दौर तक फिल्मों से जुड़े रहे
नाना पाटेकर हाल के वर्षों में भी फिल्मों में सक्रिय रहे। उन्हें ‘हाउसफुल 5’ में देखा गया था, जो 2025 में रिलीज हुई। इसके अलावा उन्होंने अलग-अलग परियोजनाओं में भी काम किया। उनकी विशिष्ट अभिनय शैली और दमदार संवाद अदायगी ने उन्हें कई पीढ़ियों के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाए रखा।
नाना पाटेकर के निधन के साथ ही हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने करीब पांच दशक के अपने फिल्मी सफर में अलग-अलग तरह के किरदारों को यादगार बनाया और अपनी अभिनय शैली की अलग पहचान कायम की।

