उत्तराखण्ड ज़रा हटके नैनीताल

नैनीताल की झीलों के सौंदर्यीकरण और स्वच्छता कार्यों की राज्यपाल ने ली जानकारी

ख़बर शेयर करें -

नैनीताल – राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने मंगलवार को लोक भवन नैनीताल में मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडेय और प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) आकाश गंगवार से शिष्टाचार भेंट कर जनपद में संचालित विकास कार्यों, पर्यटन गतिविधियों तथा वन विभाग की योजनाओं की जानकारी ली।

मुख्य विकास अधिकारी ने राज्यपाल को बताया कि नैनीताल की पहचान यहां की झीलों से है और इनके सौंदर्यीकरण एवं स्वच्छता को लेकर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए होटल व्यवसायियों के साथ समन्वय स्थापित कर मार्केट लिंकेज विकसित किया गया है।

यह भी पढ़ें 👉  Uttarakhand:-चारधाम यात्रा में टूट सकते हैं पुराने रिकॉर्ड, 25 दिनों में 12.60 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

उन्होंने जानकारी दी कि युवाओं को स्वरोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही जनपद में होम स्टे को बढ़ावा देने के साथ मानकों के विपरीत संचालित होम स्टे के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है।

राज्यपाल ने निर्देश दिए कि नैनीताल में नए पर्यटन स्थलों को विकसित किया जाए तथा पर्यटकों को अधिक समय तक आकर्षित रखने के लिए नई गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने स्थानीय उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग पर विशेष ध्यान देने को कहा, ताकि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को व्यापक बाजार मिल सके।

यह भी पढ़ें 👉  सफाई कर्मचारियों के मानदेय और सुविधाओं को लेकर शासन स्तर पर भेजे जाएंगे प्रस्ताव

इस दौरान डीएफओ नैनीताल आकाश गंगवार ने राज्यपाल को वन विभाग की गतिविधियों और वनाग्नि नियंत्रण के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष जनपद की प्रमुख चुनौतियों में शामिल है, जिससे बचाव के लिए प्रभावित क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग और अन्य सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें 👉  गौलापार में 31 दिवसीय गारमेंट्स प्रशिक्षण का शुभारंभ, युवाओं को मिलेगा स्वरोजगार का अवसर

डीएफओ ने बताया कि वनाग्नि रोकथाम के लिए पीरूल संग्रहण अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत स्थानीय लोगों को पीरूल एकत्र करने पर प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। साथ ही इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्यपाल ने वनाग्नि रोकथाम और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए जनजागरूकता और स्थानीय सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया।